अपमानित उत्तराधिकारिणी का बदला

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अध्याय 190

सुबह की रोशनी महीन, पारदर्शी परदों से ऐसे छनकर आ रही थी जैसे धुंध का घूँघट—और अस्त-व्यस्त चादरों को एक नरम, स्वप्न-सी चमक में नहला रही थी।

चार्ल्स की पलकें फड़फड़ाईं और वह करवट बदलकर जागने लगा। उसका हाथ आदतन बिस्तर के दूसरी ओर बढ़ा—और उंगलियाँ ठंडी, खाली जगह से टकरा गईं।

उसकी भौंहें उलझन में सिकुड...

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